Arrival of Foreigners in India भारत में विदेशियों का आगमन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न

भारत में यूरोपियों का आगमन (the arrival of Europeans in India)

यूरोपीय को भारत आने का सबसे पहला कारण था वह है मसाला व्यापार क्योंकि यूरोपीय देश जो है, वहां मसालों की ज्यादा जरूरत थी वहां पर मसालों की खेती नहीं की जाती थी और भारत में मसालों की खेती की जाती हैं l

तुर्की में एक जगह थी कुस्तुनतुनिया वहां पर भारत से कुछ व्यापारी अपना सामान लेकर जाते थे और कुस्तुनतुनिया से यह व्यापारी सामान को यूरोप में लेकर जाते थे।

1453 में उस्मानिया सल्तनत कुस्तुनतुनिया पर कब्जा कर लिया और जो मसाले सीधे यूरोप में पहुंच रही थी अब उसमें बाधा आने लगी यह मसालों का व्यापार स्थल मार्ग से होता था।

यूरोप के जो अलग-अलग राजा थे जैसे पुर्तगाल के राजा, स्पेन के राजा हो इन सब राजाओं ने मिलकर विचार किया कि हम भारत जाएंगे और समुद्री मार्ग से हम भारत की खोज करेंगे और सीधे सीधे मसाले हम समुद्री मार्ग से ले करके आएंगे। इस तरह से खोजो का सिलसिला चालू होता है, और अलग-अलग कंपनियां भारत आती गई।

पुर्तगालियों का भारत में आगमन(arrival of Portuguese in India)

सबसे पहले भारत आने के लिए समुद्री मार्ग की खोज पुर्तगाल के निवासी वास्कोडिगामा ने सर्वप्रथम 1498 में की थी उसके बाद दूसरे यूरोपीय कंपनियों का भारत आगमन शुरू हो गया ।

डचो का भारत में आगमन (arrival of Dutch in India)

दूसरी कंपनी डच 1605 में आए और 1759 तक भारत छोड़कर चले गया उसने अपना प्रथम केंद्र (frist center) मसूलिपटनम (आंध्र प्रदेश) में खोला गया ।

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी का आगमन ( arrival of British East India company) ( 1608 से 1947 तक)

पहले इन्होंने 1608 में भारत आए और इन्होंने अपने पहली कंपनी सूरत वाले इलाकों में खोलने की कोशिश की थी उस समय मुगल सम्राट जहागीर ने उनको यह अनुमति नहीं दी और सूरत में इनका कंपनी नहीं खुल पाया था । इन्होंने1611 में मसूलिपटनम आंध्र प्रदेश में आकर वहां पर अपना पहला केंद्र खोले।

डेनिस का आगमन Arrival of Denis (1616- 1745)

डेनिस 1616 में भारत आई और सब 1745 वापस चले गए और उसने अपना प्रथम केंद्र (frist center) Tranquebar में 1620 में खोला गया।

फ्रांसीसी का आगमन Arrival of French (1668-1954)

फ्रांसीसी ने 1668 में भारत आए और बहुत लंबे समय तक 1954 तक भारत में अपना व्यापार किए और उसके बाद चले गए और उन्होंने अपना पहला केंद्र 1668 में सूरत में खोला ।

नवीन समुद्री मार्गों की खोज (discover new sea routes)

1492 में स्पेन के निवासी कोलंबस ने अमेरिका की खोज की और 1498 में पुर्तगाल के निवासी वास्कोडिगामा ने भारत की खोज की और ब्रिटेन के निवासी ऑस्ट्रेलिया की खोज की और हॉलैंड के निवासी तस्मान में न्यूजीलैंड व तस्मानिया की खोज की थी ब्राजील की खोज kabral जो पुर्तगाल के निवासी द्वारा की जा रही है।

यूरोप में पुनर्जागरण( Renaissance in Europe)

पुनर्जागरण का मतलब था यूरोप में साहित्य का विकास हो रहा था विज्ञान का विकास हो रहा था मानवतावाद अच्छी जहाजों का निर्माण होने लगा,अच्छे-अच्छे यंत्र का निर्माण होने लगा, उसे यूरोप में पुनर्जागरण कहते हैं । पुर्तगाल भारत में वास्कोडिगामा के द्वारा आए थे आने वाले प्रथम यूरोपियन कंपनी है भारत में सबसे अंत में जो आने वाली कंपनी है। (1416-1961) 1961 तक पुर्तगाल किसी न किसी हिस्से पर भारत में दिखाई देंगे।

पुर्तगाल ने भारत में अपना पहला कंपनी कोचीन, केरल में 1503 में स्थापित किया। 1498 में VDG भारत आया उसके बाद पुर्तगाल वापस गया तो उसे 60 गुना मुनाफा हुआ । उसके बाद पुर्तगाल की सरकार ने यह निर्णय लिया कि अब वह एक कंपनी का निर्माण करेगी और भारत के साथ यही कंपनी ट्रेड करेगी। इसी कंपनी को इस्तादो -द-इंडिया नामक कंपनी कहा गया।

पुर्तगाल (Portugal)(1498-1961)

पुर्तगाल की राजधानी Lisbon है, पुर्तगाल के राजकुमार हेनरी द नेविगेटर । पुर्तगाल के राजकुमार हेनरी द नेविगेटर सबसे पहले 1487 में बर्थोलोमियो डियाज (Bartholomew Diaz) को भारत की खोज करने के लिए सबसे पहले भेजा गया कि तुम जाओ और पता करके आओ यह मसाले हमारे पास कैसे आते हैं, उसका रास्ता ढूंढ कर आओ।

वास्कोडिगामा से पहले भेजा गया बर्थोलोमियो डियाज को भारत की खोज करने के लिए तो बर्थोलोमियो डियाज ने केप आफ गुड होते हुए वह अफ्रीका का सबसे दक्षिणी किनारा वहां तक तो आया उसके बाद वहीं से वापस लौट गया। 20 मई 1498 को हेनरी द नेविगेटर ने वास्कोडिगामा से कहा तुम जाओ और भारत की खोज करके आओ । 20 May1498 उसने वास्कोडिगामा को पुर्तगाल से रवाना किया।

वास्कोडिगामा 1498 को पुर्तगाल से निकला था और केप ऑफ गुड होप होते हुए एक गुजराती यात्री अहमद मजीदी की सहायता से भारत के कालीकट बंदरगाह पर पहुंचा जहां पर उसका स्वागत जमोरिन द्वारा किया गया। जब पुर्तगाली यात्री वास्कोडिगामा भारत आया उस समय पुर्तगाल में कौन सी राजकुमार परचूगिज प्रिंस हेनरी थे या द नेविगेटर ड्यूक ऑफ विसेयू (4 मार्च 1394 – 13 नवंबर 1460), जिसे 259,प्रिंस हेनरी द नेविगेटर ,213 के रूप में जाना जाता है। द नेविगेटर की उपाधि पुर्तगाल के राजकुमार प्रिंस हेनरी को दी जाती है।

पुर्तगाली शासन का भारत में विस्तार (expansion Portuguese rule in India )

पहला पुर्तगाली गवर्नर फ्रांसिस्को डी अल्मीडा है यह पुर्तगाली गवर्नर 1505 में भारत आए जब पुर्तगाली ईस्ट इंडिया कंपनी भारत आई उस समय पुर्तगाल के राजा मैनुअल प्रथम थे जबकि पुर्तगाल के राजकुमार डान हेनरीक (हेनरी द नेविगेटर) को कहा जाता है। जब पुर्तगाली भारत में आए तो उत्तर भारत में उस समय दिल्ली सलतन में लोदी वंश का शासक था लोदी रजिस्ट्री में भी सिकन्दर लोदी का शासन चल रहा था जो गुलरुखी के नाम से अपनी कविताएं लिखा करते थे। विजय नगर में नरसिंह राव का शासन चल रहा है, गुजरात में महमूद बेगड़ा का शासन चल रहा है।

नोट:- बास्कोडिग्मा ने भारत में सावो गेब्रीपल (sao Gabriel) नामक जहाज से आया था। 1502 में दोबारा भारत आया 1503 में कोचिंग में प्रथम फैक्ट्री खोला गया 1524 में तीसरी बार भारत आया,और वास्कोडिगामा की मृत्यु 24 दिसंबर 1524 में कोचीन अर्थात केरल में मौत हो गई।

मुझे आशा है कि आप सभी को Arrival of Foreigners in India इस लेख से बहुत कुछ सीखने को मिला होगा। इस लेख को पूरा पढ़ने के लिए आप सभी को बहुत बहुत धन्यबाद।

edigitalhindi

Most Important GK GS And Current Affairs In Hindi 2021

Best Powerful Motivational Speech in Hindi जो आप की जिंदगी को बदल देगी

6 Habits of a Successful Person That Always Keep Him Fit एक सफल व्यक्ति की 6 आदतें जो उन्हें हमेशा फिट रखती हैं

You will definitely get what you want जो आप चाहेंगे वह आपको जरूर मिलेगा

पाकिस्तान में जिन्ना की मूर्ति को बम से उड़ाया गया Pakistaan ne Jinnah ki Murti ko Bamb se Udaya

चीन में बिजली संकट, फैक्ट्री बंद Electricity crisis in China

1 thought on “Arrival of Foreigners in India भारत में विदेशियों का आगमन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न”

  1. Pingback: UP Free Laptop Yojana 2021 उत्तर प्रदेश फ्री लैपटॉप वितरण योजना

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top